नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91 9816484075 , 9459106075 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें , बंजार सराज में आगजनी की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता, तीर्थन घाटी में बार-बार जल रहे पहाड़ी गांव। घास के पढ़ाछे बन रहे आग का कारण, डेढ़ माह में गुशेनी क्षेत्र के चार गांव प्रभावित। – Desi Channel Kullu

Desi Channel Kullu

देवधरा हिमाचल की धड़कन,संस्कृति और सच के साथ।

बंजार सराज में आगजनी की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता, तीर्थन घाटी में बार-बार जल रहे पहाड़ी गांव। घास के पढ़ाछे बन रहे आग का कारण, डेढ़ माह में गुशेनी क्षेत्र के चार गांव प्रभावित।

😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊

बंजार सराज में आगजनी की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता, तीर्थन घाटी में बार-बार जल रहे पहाड़ी गांव।

घास के पढ़ाछे बन रहे आग का कारण, डेढ़ माह में गुशेनी क्षेत्र के चार गांव प्रभावित।

मानवीय लापरवाही, सूखी घास और सटे घर बन रहे विनाश का कारण, निर्माण और भंडारण नीति नहीं बदली तो आपदा तय-गुमान सिंह.

तीर्थन घाटी गुशेनी बंजार(परस राम भारती):- जिला कुल्लू के बंजार सराज क्षेत्र में लगातार हो रही आगजनी की घटनाओं ने पूरे इलाके को चिंता में डाल दिया है। तीर्थन घाटी के नोहंडा क्षेत्र में बीते डेढ़ महीने के भीतर चार गांव आग की चपेट में आ चुके हैं। हिमालय नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह ने इन घटनाओं पर गंभीर चिंता जताते हुए इसे पहाड़ी गांवों के लिए एक बड़ी चेतावनी बताया है।

सबसे पहले ग्राम पंचायत नोहन्डा के झनियार गांव में दिन के समय आग लगने से 16 घर पूरी तरह जलकर राख हो गए थे। इसके बाद राहत एवं पुनर्वास कार्य चला और सरकार द्वारा प्रभावित परिवारों को प्रति घर सात से आठ लाख रुपये की सहायता देने की बात कही है। इसके कुछ ही दिनों बाद इसी पंचायत से सटे डिंगचा क्षेत्र के शाई गांव में एक घर आग की भेंट चढ़ गया। पिछले महीने बूढ़ी दिवाली के दिन नाहीं गांव में भी आगजनी की घटना सामने आई।

ताजा मामला शुक्रवार की शाम का है, जब झनियार गांव के सामने स्थित ग्राम पंचायत पेखड़ी के गांव पेखड़ी में आग लग गई। इस घटना में तीन खलह/छानके (घास भंडारण घर) पूरी तरह जलकर नष्ट हो गए। संयोगवश गांव में उस दिन एक शोक कार्यक्रम के कारण बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे, जिनके सामूहिक प्रयास से आग पर काबू पा लिया गया। ग्रामीणों की तत्परता से 70–80 घरों वाले घनी आबादी के पेखड़ी गांव को बड़ी तबाही से बचा लिया गया। प्रारंभिक तौर पर आग लगने का कारण खलह में रखी सूखी घास में किसी नामालूम व्यक्ति की लापरवाही से लगी आग माना जा रहा है। इसी तरह का कारण पहले झनियार और पिछले वर्ष तांदी गांव की आगजनी में भी सामने आया था।

बार-बार आग की चपेट में पहाड़ी गांव

हिमालय नीति अभियान के अनुसार मंडी, कुल्लू और शिमला जिलों के ऊपरी क्षेत्रों, विशेषकर सराज इलाके में इन दिनों आगजनी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पिछले वर्ष इन्हीं दिनों बंजार का तांदी गांव पूरी तरह जलकर नष्ट हो गया था। इससे पहले कोटला, मोहनी और जंजैहली क्षेत्र के केउली गांव में भी ऐसी ही भयावह घटनाएं हो चुकी हैं।

आग लगने के मुख्य कारण

गुमान सिंह के अनुसार, ऊंचे बर्फीले इलाकों में सर्दियों के लिए पशुओं की घास जमा करने की परंपरा आग की घटनाओं का प्रमुख कारण बन रही है। सूखी घास खलह या छानकों में रखी जाती है, जो जरा सी चिंगारी से भड़क उठती है। पहले भारी बर्फबारी के कारण यह व्यवस्था जरूरी थी, लेकिन अब जलवायु परिवर्तन के चलते बर्फ कम पड़ रही है, फिर भी पुरानी व्यवस्था जारी है।

इसके अलावा पशुओं को छानकों में रखना, बीड़ी-सिगरेट और शराब के नशे में लापरवाही, पटाखे, बिजली की खराब वायरिंग, घरों का एक-दूसरे से सटा होना और लकड़ी से बने काठकुणी मकान भी आग को तेजी से फैलाने में सहायक बनते हैं। जंगलों में लगने वाली आग और गांवों के आसपास कचरा जलाना भी खतरे को बढ़ाता है।

बचाव के लिए जरूरी कदम

हिमालय नीति अभियान ने आग से बचाव के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। घास भंडारण के लिए खलह और छानकों को रिहायशी घरों से दूर बनाया जाए। घरों के आसपास सूखी घास और कचरा न रखा जाए तथा जंगल से सटे क्षेत्रों में नियमित सफाई की जाए। गांवों में घरों का निर्माण नियोजित ढंग से हो, ताकि एक घर से दूसरे घर के बीच पर्याप्त दूरी रहे।

इसके साथ ही गांवों में पानी के भंडारण के लिए तालाब, कुएं या बड़े टैंक बनाए जाएं, अग्निशमन सुविधाओं की पहुंच दूरदराज गांवों तक बढ़ाई जाए और ग्रामीणों को आग से बचाव के बारे में नियमित रूप से जागरूक किया जाए।

गुमान सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में ग्राम पंचायत और ग्राम सभा की भूमिका सबसे अहम है। स्थानीय भौगोलिक और भूगर्भीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्माण और सुरक्षा के नियम तय किए जाएं और उन्हें सख्ती से लागू किया जाए।

सराज क्षेत्र में लगातार हो रही आगजनी की घटनाएं यह साफ संकेत देती हैं कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में नुकसान और भी बड़ा हो सकता है। सावधानी, जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी ही पहाड़ी गांवों को इस बढ़ते खतरे से बचा सकती है।

Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें 

Advertising Space


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे.

Donate Now

लाइव कैलेंडर

January 2026
M T W T F S S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031