जिला लाहौल एवं स्पीति के सिस्सू में दो दिवसीय होमस्टे मार्केटिंग कार्यशाला का सफल आयोजन।
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जिला लाहौल एवं स्पीति के सिस्सू में दो दिवसीय होमस्टे मार्केटिंग कार्यशाला का सफल आयोजन।
स्थानीय समुदाय को मिला सशक्तिकरण का नया मार्ग।
प्रोजेक्ट पीओपीजीटी के तहत दो दिवसीय प्रशिक्षण में 30 होमस्टे संचालकों ने लिया भाग।
ग्रामीण पर्यटन के विकास में स्थानीय पंचायतों की बढ़ेगी भूमिका।
लाहौल (सिस्सू):- हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण पर्यटन को बढाबा देने के लिए कई संस्थाएं भी आगे आ रही है। इसी कड़ी में पीपल फॉर हिमालयन डेवलपमेंट संस्था अन्य सहयोगी संस्थाओं के साथ मिलकर लाहौल घाटी में स्थानीय परम्पराओं, प्रकृति और समुदाय आधारित स्थाई पर्यटन के मॉडल पर काम कर रहे है।
लाहौल घाटी के सिस्सू में 15 और 16 अक्टूबर को आयोजित दो दिवसीय होमस्टे मार्केटिंग कार्यशाला ने स्थानीय समुदाय को आत्मनिर्भर पर्यटन की दिशा में नई प्रेरणा दी। यह कार्यशाला प्रोजेक्ट पीओपीजीटी
“जन स्वामित्व और जन संचालन आधारित पर्यटन”
के तहत आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य स्थानीय लोगों को पर्यटन विकास का स्वामी और संचालक बनाना है।
यह परियोजना पीपल फॉर हिमालयन डेवलपमेंट संस्था की एक अच्छी पहल है। संस्था के प्रबंध निदेशक संदीप मिन्हास का कहना है कि “स्थायी पर्यटन तभी संभव है जब स्थानीय समुदाय खुद इसका नेतृत्व करें और इससे सीधा लाभ प्राप्त करें।” पिछले दो वर्षों से अविनाश शर्मा और ललिता ने रॉयल एनफील्ड सोशल मिशन के सहयोग से सिस्सू और कोक्सर क्षेत्र में इस परियोजना को सफलतापूर्वक लागू किया है।
कार्यशाला की झलकियाँ
कार्यशाला में सिस्सू और कोक्सर के लगभग 30 होमस्टे संचालकों ने भाग लिया।
होमस्टेज़ ऑफ इंडिया के सह-संस्थापक विनोद और शैल्जा ने प्रतिभागियों को सिखाया कि डिजिटल माध्यमों से अपने होमस्टे का प्रचार कैसे करें, अतिथियों के अनुभव को कैसे बेहतर बनाएं और स्थानीय संसाधनों के आधार पर बेहतर आतिथ्य कैसे प्रदान करें।
चेरी होमस्टे की संचालिका सुनीता ने बताया कि “इस कार्यशाला ने हमें सिखाया कि हम अपने होमस्टे को भावनात्मक और पेशेवर तरीके से प्रस्तुत करें। अब हमें अपने होमस्टे को ऑनलाइन प्रचारित करने का आत्मविश्वास मिला है।”
हैप्पी ट्रेल्स होमस्टे के मनोज मिरूपा और डेकिड ने कहा,कि इस कार्यशाला में प्रशिक्षकों से मिली सीख ने हमारे पर्यटन दृष्टिकोण को बदल दिया है। अब हम अपने गाँव और संस्कृति को सही ढंग से प्रस्तुत कर पाएंगे।”
नई दिशाएँ और उपलब्धियाँ
इस वर्ष पंचायत पर्यटन विकास समितियों द्वारा बनाए गए होमस्टे दिशानिर्देशों को सभी संचालकों ने अपनाया। इससे सेवा की गुणवत्ता, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और सामुदायिक लाभ के नए मानक तय हुए हैं। कार्यशाला में यह भी चर्चा हुई कि कैसे पर्यटकों को गाँव की संस्कृति और आकर्षणों की जानकारी दी जाए, और उनके अनुभवों को मापने के लिए फीडबैक टूल्स का उपयोग किया जाए।
यहाँ पर आने वाले छह महीनों में क्षेत्र के पाँच चुने हुए होमस्टे संचालक होमस्टेज़ ऑफ इंडिया के मार्गदर्शन में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे ताकि वे स्थायी पर्यटन मॉडल के उदाहरण बन सकें।
नेतृत्व की प्रतिक्रियाएँ
संदीप मिन्हास ने कहा कि “जन स्वामित्व और जन संचालन आधारित पर्यटन” केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का आंदोलन है। स्थानीय ग्राम पंचायतों और समुदायों की भागीदारी इसका सबसे बड़ा आधार है।”
अविनाश शर्मा और ललिता ने कहा कि
“हमारा उद्देश्य केवल कार्यशालाएँ आयोजित करना नहीं, बल्कि स्थानीय नेतृत्व और आत्मनिर्भर पर्यटन को निरंतर बढ़ावा देना है
होमस्टे ऑफ़ इंडिया की ओर से प्रशिक्षक विनोद और शैल्जा ने कहा कि सिस्सू और कोक्सर के होमस्टे संचालक जिम्मेदार पर्यटन का जीवंत उदाहरण हैं और उनकी लगन पूरे लाहौल क्षेत्र के लिए प्रेरणा है।
सिस्सू और कोक्सर की पंचायत पर्यटन विकास समितियों, होमस्टे संचालकों और घाटी के पर्यटन कारोबारिओं ने पीपल फॉर हिमालयन डेवलपमेंट और रॉयल एनफील्ड सोशल मिशन के प्रति आभार जताया है, जिनकी मदद से यह समुदाय आधारित पर्यटन की पहल सफल हुई। प्रोजेक्ट
“जन स्वामित्व और जन संचालन आधारित पर्यटन”
अब लाहौल घाटी में स्थानीय परंपराओं, प्रकृति और समुदाय को जोड़ते हुए स्थायी पर्यटन का सशक्त मॉडल बन चुका है।
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