डायबिटीज़ की असली लड़ाई इलाज नहीं, जागरूकता की है — डॉ. कल्याण सिंह
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जब मरीज अनजान रहते हैं, तो डायबिटीज़ नियंत्रण अभियान असफल हो जाते हैं — असली लड़ाई इलाज की नहीं, जागरूकता की है
पूजा कश्यप /देसी चैनल कुल्लू
डायबिटीज़ यानी मधुमेह को अक्सर “मूक हत्यारा” कहा जाता है, क्योंकि यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर के लगभग हर अंग को प्रभावित करती है। प्रारंभिक लक्षण हल्के होने के कारण अधिकांश मरीज देर से उपचार शुरू करते हैं, जब तक कि बीमारी गंभीर रूप न ले ले।
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. कल्याण सिंह (MD, DFDI) ने बताया कि मधुमेह केवल “शुगर की बीमारी” नहीं है, बल्कि यह शरीर के ऊर्जा उपयोग की प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला चयापचय विकार (Metabolic Disorder) है। लंबे समय तक बढ़ी हुई शुगर से आँखों, गुर्दों, हृदय, नसों और मस्तिष्क तक पर दुष्प्रभाव पड़ता है।
डॉ. सिंह के अनुसार, “डायबिटीज़ की असली लड़ाई इलाज से ज्यादा जागरूकता की है। यदि लोग शुरुआत से ही सावधान रहें, नियमित जाँच करवाएँ और शुगर को नियंत्रण में रखें, तो इस बीमारी की जटिलताओं से बचा जा सकता है।”
उन्होंने कहा कि अनियंत्रित मधुमेह से —
- मस्तिष्क पर असर पड़ता है, जिससे स्मरण शक्ति कमजोर होती है।
- हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
- गुर्दे खराब हो सकते हैं, जिससे डायलिसिस की ज़रूरत पड़ती है।
- आँखों की रोशनी कम हो सकती है।
- नसों की क्षति के कारण अंग कटने की नौबत तक आ सकती है।
डॉ. सिंह ने बताया कि मधुमेह की रोकथाम के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण और धूम्रपान से परहेज़ बेहद आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि हर मरीज को समय-समय पर ब्लड शुगर, किडनी, आँखों और हृदय की जांच अवश्य करवानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि— “अनियंत्रित डायबिटीज़ चुपचाप सेहत छीन लेती है, लेकिन जागरूकता और अनुशासन से इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।”
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