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कुल्लू में स्मार्ट मीटर के खिलाफ भारी हुंकार: महिलाओं ने घेरा ढालपुर, जिलाधीश के माध्यम से सरकार को चेताया

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कुल्लू में स्मार्ट मीटर के खिलाफ भारी हुंकार: महिलाओं ने घेरा ढालपुर, जिलाधीश के माध्यम से सरकार को चेताया

देसी चैनल कुल्लू

कुल्लू: हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में स्मार्ट मीटर लगाने के निर्णय के विरोध में जन-आक्रोश सड़कों पर उतर आया है। विद्युत बोर्ड पेंशनर्स फोरम की अगुवाई में आयोजित इस विशाल प्रदर्शन में सैकड़ों महिलाओं, स्थानीय व्यापारियों और आम नागरिकों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। ढालपुर का ऐतिहासिक मैदान “स्मार्ट मीटर वापस लो” और “बिजली का निजीकरण बंद करो” जैसे नारों से गूंज उठा। प्रदर्शन के अंत में आंदोलनकारियों ने जिलाधीश (DC) के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा, जिसमें इस योजना को तुरंत वापस लेने की मांग की गई है।

कॉर्पोरेट घरानों को लाभ पहुँचाने का षड़यंत्र: कुलदीप सिंह खरवाड़ा

धरने को संबोधित करते हुए विद्युत बोर्ड पेंशनर्स फोरम के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष कुलदीप सिंह खरवाड़ा ने विभाग और सरकार पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बिजली कानून 2025 के माध्यम से निजी कॉर्पोरेट कंपनियों को ‘लूट का लाइसेंस’ दिया जा रहा है। खरवाड़ा ने स्पष्ट किया, “स्मार्ट मीटरिंग उपभोक्ताओं की जरूरत नहीं बल्कि कॉर्पोरेट घरानों की मजबूरी है, ताकि वे डेटा सेंटर में बैठकर मुनाफे का हिसाब रख सकें। विभाग यह सच छिपा रहा है कि इन मीटरों की 9,000 से 10,000 रुपये की कीमत अगले 9 वर्षों तक मासिक रेंटल के रूप में उपभोक्ताओं की जेब से ही वसूली जाएगी।”

आंकड़ों के जरिए घेरा: 2,500 करोड़ के टेंडर पर सवाल

प्रेस नोट के माध्यम से खरवाड़ा ने बताया कि प्रदेश में लगभग 13 लाख उपभोक्ता ऐसे हैं जिनका बिजली बिल 125 यूनिट की छूट के कारण शून्य आता है, ऐसे में उन पर महंगे स्मार्ट मीटर थोपने का कोई औचित्य नहीं है। मुख्य बिंदु जो ज्ञापन में उठाए गए:

• संसाधनों की बर्बादी: वर्तमान में लगे करोड़ों रुपये के इलेक्ट्रॉनिक और ट्राई-वेक्टर मीटरों को कबाड़ में फेंकना जनता के पैसे की बर्बादी है।

• रोजगार पर संकट: इस योजना से लगभग 1,500 आउटसोर्स कर्मचारियों की नौकरी जाएगी और नियमित स्टाफ भी सरप्लस हो जाएगा।

• निजीकरण की राह: मीटरिंग, बिलिंग और राजस्व उगाही जैसे काम निजी कंपनियों को सौंपने से भविष्य में विद्युत उप-मण्डल बंद होने की कगार पर पहुँच जाएंगे।

सरकार को दोटूक चेतावनी

जिलाधीश के माध्यम से भेजे गए ज्ञापन में महिलाओं और पेंशनर्स फोरम ने स्पष्ट किया है कि सरकार को बिजली की लाइनों, ट्रांसफार्मरों और उप-केन्द्रों को ‘स्मार्ट’ बनाने पर ध्यान देना चाहिए, न कि गरीब जनता पर मीटर का बोझ डालना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि विभाग में नई भर्ती कर ‘स्मार्ट मैनपावर’ तैयार की जाए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस जनविरोधी फैसले को वापस नहीं लिया, तो आने वाले समय में पूरे प्रदेश में एक निर्णायक और उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।

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