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ब्यासर से मापक वहाव सिंचाई योजना का हस्तांतरण, 159 किसानों को मिलेगा लाभ

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ब्यासर से मापक वहाव सिंचाई योजना का हस्तांतरण, 159 किसानों को मिलेगा लाभ

देसी चैनल कुल्लू 
परियोजना निदेशक डॉ. सुनील चौहान ने किसानों को आधुनिक तकनीक और फसल विविधीकरण अपनाने का दिया संदेश
हिमाचल प्रदेश में चल रहे फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना (चरण II) जायका (कृषि) के तहत खण्ड परियोजना प्रबंधन इकाई कुल्लू, जिला कुल्लू के अंतर्गत आने वाले गाँव ब्यासर में जल वहाव सिंचाई योजना ब्यासर से मापक का निर्माण कार्य पूरा होने के पर दिनांक 13 मार्च, 2026 को राज्य परियोजना प्रबंधक डॉ० सुनील चौहान, हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना (चरण II) जायका-ओo डीo ने प्रधान कृषक विकास संघ ब्यासर श्री टेक चंद जी व सचिव ग्राम पंचायत बन्दरोल श्री सेस राम जी कि उपस्थिति में योजना का शुभारंभ किया । इस उपलक्ष पर जिला परियोजना प्रबंधन मंडी डॉo हेम राज वर्मा, विषयवाद विशेषज्ञ डॉo खुब राम, खंड परियोजना प्रबंधक कुल्लू डॉo जयंत रत्ना उपस्थित रहे ।
सर्वप्रथम डॉo जयंत रत्ना ने ब्यासर से मापक उप-परियोजना के हस्तांतरण समारोह पर पधारने के लिए मुख्यातिथि डॉo सुनील चौहान का आभार प्रकट किया । इसके पश्चात डॉo हेम राज वर्मा ने परंपरागत तरीके से डॉo सुनील चौहान व कृषक विकास संघ प्रधान श्री टेक सिंह जी का कुलवी टोपी व मफ़लर पहना कर स्वागत किया तथा डॉo जयंत रत्ना ने जिला परियोजना प्रबंधक मंडी डॉo हेम राज वर्मा, विषयवाद विशेषज्ञ डॉo खुब राम , सचिव ग्राम पंचायत बन्दरोल श्री सेस राम जी , पूर्व प्रधान ग्राम पंचायत बन्दरोल श्री मति निर्मला देवी का कुलवी टोपी व मफ़लर पहना कर स्वागत किया ।
डॉo जयंत रतना ने स्वागत सम्बोधन के साथ जायका (कृषि) परियोजना के अंतर्गत जिला कुल्लू में किए जा रहे विभिन कार्यों का संक्षिप्त ब्योरा दिया एवं वहाव सिंचाई योजना ब्यासर से मापक के वारे में सम्पूर्ण जानकारी दी एवं बताया की जायका (कृषि) के तहत बनी इस योजना के निर्माण कार्य पर 82,77,000 /- रुपये खर्च किए गए है । इस योजना के तहत लगभग 34.80 हेक्टेयर भूमि को शामिल किया गया है तथा यह भी बताया कि ब्यासर से मापक योजना के अंतर्गत 159 किसान परिवार लाभान्वित होंगे । डॉo जयंत रत्ना ने बताया की इस योजना का निर्माण कार्य निर्धारित समय में ही पूरा किया गया है तथा उन्होंने कृषक विकास संघ के प्रतिनिधियों व लाभार्थियों का निर्माण कार्य के दौरान एवं परियोजना कि अन्य गतिविधियों में सहयोग देने के लिए धन्याबाद किया ।
डॉo हेम राज वर्मा ने लाभार्थियों को परियोजना के अंतर्गत आने वाली योजनाएँ जैसे जल भंडारण टैंक का निर्माण, जलग्रहण क्षेत्र उपचार, सोलर फोटो वोल्टिक इकाई, सोलर बाड़ लगाना, कृषि सड़कों का सुदृढ़ीकरण, कस्टम हाइरिंग के आधार पर कृषि मशीनरी के उपयोग को बढावा देना, पॉली हाउस, पॉली टनल का प्रावधान, डेयरी, मशरूम खेती आदि का प्रावधान, सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली (ड्रिप / स्प्रिंकलर), फसल विविधीकरण व उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण, किसानों को किसान विकास संघ, स्वयं सहायता समूह व किसान समूहों में संगठित करना व FPO का गठन इत्यादि के बारे में अवगत करवाया ।
परियोजना निदेश डॉo सुनील चौहान ने कृषक विकास संघ को परियोजना के रख-रखाव के लिए आवश्यक औजारों की किट तथा लाभार्थियों को गृह वाटिका के लिए सीड किट वितरित की । इसके पश्चात डॉo सुनील चौहान ने लाभार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में खेती के लिए पानी की उपलब्धता हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। उन्होंने कहा कि फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना के माध्यम से न केवल सिंचाई ढांचे का विकास किया जा रहा है बल्कि किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने के प्रयास भी किया जा रहा हैं। डॉ. चौहान ने इस अवसर पर कृषक विकास संघ बयासर की भूमिका पर भी विशेष बल दिया । उन्होंने बताया कि जो कृषक विकास संघ का पंजीकरण किया गया है इसके माध्यम से किसान सामूहिक रूप से योजना के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी निभाएंगे । उन्होंने संघ के अध्यक्ष श्री टेक सिंह तथा अन्य सदस्यों से आग्रह किया कि वे जल संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करें और सामूहिक प्रयासों से इस योजना को सफल बनाएं । उन्होंने लाभार्थियों को हर माह कृषक विकास संघ की बैठक करने के निर्देश दिए । उन्हे कोल्ड स्टोर स्थापित तथा F.P.O. (farmer producer organization) का गठन करने के लिए भी प्रेरित किया । इसके पश्चात मुख्यातिथि ने सम्पूर्ण योजना का निरीक्षण किया तथा विधिवत रूप से सलूस वाल्व घूम कर उप-परियोजना का शुभआरंभ किया । तथा लाभार्थियों से आग्रह किया की वे सभी योजना का रख – रखाव करें ।
अंत में उन्होंने सभी अतिथियों एवं किसानों का आभार प्रकट करते हुए धन्यबाद किया ।
जायका की परियोजना का मुख्य लक्ष्य नगदी फसलों की खेती के माध्यम से फसल विविधकरण करके किसानों की आय में बढ़ोतरी करना है । कुछ क्षेत्रों में पानी की कमी होने के कारण या पानी का उचित वितरण न होने के कारण किसान फसलों की सही पैदावार नहीं ले पाते है, परिणामस्वरूप काम मुनाफा कमाते है । जायका के तहत ऐसे क्षेत्रों में पहले सिंचाई लाने के लिए कुहल का निर्माण किया जा रहा है तथा कुहल के निर्माण के बाद किसानों को नगदी फसलों को उगाने के लिए प्रेरित किया जाना है, जिससे किसानों को फसलों के अच्छे दाम मिले तथा अपनी आर्थिक सतिथि में सुधार कर सकें । इस सिंचाई योजना के बनने से किसानों कि आमदनी बढेगी । इसके उपरांत डॉ सुनील चौहान ने अपर वैली फार्मर प्रोडूसर कंपनी, लाहौल बास्केट महिला स्वयं सहायता समूह एवं देव नारायण मधुमखी पालन सहकारिता सोसाइटी समिति के साथ F.P.O. (farmer producer organization) पर समीक्षा बैठक की ।
इस उपलक्ष पर जिला परियोजना प्रबंधन इकाई मंडी से निर्माण अभियंता श्री अंकुश शर्मा, खंड परियोजना प्रबंधन इकाई कुल्लू से निर्माण अभियंता श्री भरत भूषण, कृषि अधिकारी श्री हिमांशु ठाकुर, कनिष्ठ अभियंता श्री मनमोहन सिंह व कृषि प्रसार अधिकारी श्री मति जया प्रधा एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे ।

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