जायका (कृषि) द्वारा कृषक विकास संगठनों के प्रबंधन समिति सदस्यों के लिए भूमिका एवं उत्तरदायित्व पर प्रशिक्षण आयोजित”
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जायका (कृषि) द्वारा कृषक विकास संगठनों के प्रबंधन समिति सदस्यों के लिए भूमिका एवं उत्तरदायित्व पर प्रशिक्षण आयोजित”
देसी चैनल कुल्लू
खण्ड परियोजना प्रबंधन इकाई, हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना (चरण II) जायका-ओo डीo एo, कुल्लू, जिला कुल्लू (हिo प्रo) द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र, बजौरा में दिनांक 21 अगस्त,
2026 को जिला कुल्लू के अंतर्गत आने वाली 16 उप-परियोजनाओं के कृषक विकास संगठनों के 42 प्रबंधन समिति के सदस्यों के लिए एक दिवसीय भूमिका एवं उत्तरदायित्व कार्यक्रम (Training to MC Members of KVAs on “Role &
Responsibility”) का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ खण्ड परियोजना प्रबंधक, कुल्लू, डॉ. जयंत रत्ना द्वारा किया गया। उन्होंने उपस्थित सभी संसाधन व्यक्तियों एवं कृषक विकास संगठनों के प्रबंधन समिति सदस्यों का स्वागत किया तथा प्रशिक्षण के उद्देश्य एवं महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कृषक विकास संगठनों को प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाने में प्रबंधन समिति के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है। समिति के सदस्यों को अपने दायित्वों एवं जिम्मेदारियों की उचित जानकारी होने से संगठन की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जा सकता है।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को कृषक विकास संगठनों के गठन एवं संचालन, प्रबंधन समिति की भूमिका, सदस्यों के दायित्व, संगठनात्मक प्रबंधन, अभिलेखों के रख-रखाव, बैठकों के आयोजन, निर्णय लेने की प्रक्रिया, वित्तीय प्रबंधन तथा परियोजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्य करने संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त, कृषक विकास संगठनों को आत्मनिर्भर एवं प्रभावी ढंग से संचालित करने तथा लाभार्थी किसानों के हित में बेहतर कार्य करने के लिए आवश्यक व्यवहारिक पहलुओं पर भी चर्चा की गई।
इस अवसर पर जिला परियोजना प्रबंधक मंडी डॉ. हेम राज वर्मा द्वारा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री बलजीत सिंह संधू, मुख्य सलाहकार (Chief
Consultant), हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना (चरण ii) जायका – ओo डीo एo, हमीरपुर, डॉ. राजेश ठाकुर, उप-परियोजना निदेशक तथा पीo एमo सीo से डॉo नरदेव ठाकुर (post-harvest
expert) व डॉo आरo एसo ठाकुर (institutional
development expert) का स्वागत एवं सम्मान किया गया।
इसके अतिरिक्त, डॉ. राजेश ठाकुर द्वारा किसानों की आय में वृद्धि, कृषि उत्पादों के बेहतर मूल्य प्राप्त करने तथा किसानों को बाजार से प्रभावी रूप से जोड़ने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। उन्होंने कृषि एवं सिंचाई संबंधी निर्माण कार्यों, विभिन्न फसल प्रदर्शनों (Demonstrations) तथा बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उत्पादन के साथ-साथ संग्रहण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, मूल्य संवर्धन (Value
Addition), ब्रांडिंग एवं विपणन पर भी विशेष ध्यान देना आवश्यक है। डॉ. राजेश ठाकुर ने कहा कि किसानों को उत्पादन से लेकर बाजार तक की पूरी मूल्य श्रृंखला (Value
Chain) से जोड़ना आवश्यक है। किसानों को केवल उत्पादक के रूप में नहीं, बल्कि संग्रहण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन एवं विपणन में सक्रिय भागीदार बनाने से उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य सुनिश्चित किया जा सकता है। सामूहिक प्रयासों एवं मजबूत market
linkage के माध्यम से किसानों की आय में स्थायी वृद्धि के साथ-साथ कृषि को अधिक लाभकारी एवं व्यवसायिक गतिविधि के रूप में विकसित किया जा सकता है।
डॉ. आर.एस. ठाकुर ने कृषक विकास संगठनों (KVAs) की प्रबंधन समिति के सदस्यों की भूमिका एवं उत्तरदायित्वों पर चर्चा करते हुए नियमित बैठकें, अभिलेखों का रख-रखाव, सामूहिक निर्णय, किसानों की समस्याओं का समाधान तथा सिंचाई योजनाओं के उचित संचालन एवं रख-रखाव पर जोर दिया। उन्होंने KVA को किसानों एवं परियोजना के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए फसल विविधीकरण, नई कृषि तकनीकों, Demonstrations,
Extension Activities तथा FPOs के माध्यम से market linkage मजबूत करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। साथ ही, किसानों की आय बढ़ाने के लिए सामूहिक विपणन,
value addition, डेयरी, मधुमक्खी पालन, शहद उत्पादन एवं सूखी सब्जियों जैसी आयवर्धक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी चर्चा की।
डॉ. नरदेव ठाकुर ने छोटे स्तर के FPOs से बड़े एवं सफल FPOs के विकास तक के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने FPO की सफलता के लिए किसानों की सक्रिय भागीदारी, सामूहिक निर्णय, बेहतर प्रबंधन तथा सामूहिक खरीद,
grading, packaging, processing, value addition एवं collective
marketing को महत्वपूर्ण बताया। साथ ही,
FPOs को ब्रांडिंग एवं market linkage के माध्यम से व्यवसायिक रूप से मजबूत बनाने पर जोर दिया।
प्रशिक्षण के दौरान सभी प्रतिभागियों ने संसाधन व्यक्तियों एवं वक्ताओं के साथ उपरोक्त विषयों से संबंधित अपने अनुभव, समस्याएं एवं सुझाव भी साझा किए। प्रतिभागियों द्वारा कृषक विकास संगठनों के संचालन, सिंचाई योजनाओं के रख-रखाव, किसानों की भागीदारी, कृषि उत्पादन, बाजार से जुड़ाव, कृषि उत्पादों के उचित मूल्य, मूल्य संवर्धन तथा FPOs के माध्यम से सामूहिक विपणन से संबंधित विभिन्न समस्याओं एवं व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चा की गई। वक्ताओं द्वारा प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं एवं समस्याओं का समाधान करते हुए आवश्यक मार्गदर्शन एवं सुझाव प्रदान किए गए। इस इंटरैक्टिव चर्चा एवं प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों को अपने क्षेत्र में आने वाली वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए व्यावहारिक जानकारी प्राप्त हुई। साथ ही, प्रतिभागियों को आपसी अनुभव साझा करने तथा एक-दूसरे से सीखने का अवसर भी मिला।
इसके उपरांत डॉ. सुरेंद्र कुमार ठाकुर, कार्यक्रम समन्वयक, कृषि विज्ञान केंद्र, बजौरा ने कृषि विज्ञान केंद्र की विभिन्न गतिविधियों एवं किसानों के लिए उपलब्ध तकनीकी सेवाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र, बजौरा जिला कुल्लू के समस्त किसानों के लिए कृषि, बागवानी, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, उद्यमिता विकास तथा कृषि आधारित आजीविका से संबंधित तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन कार्यक्रमों का संचालन करता है।
अंत में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री बलजीत सिंह संधू, मुख्य सलाहकार (Chief
Consultant) द्वारा हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना (चरण-II), जायका-ओ.डी.ए. के उद्देश्यों एवं लक्ष्य पर विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने परियोजना के माध्यम से फसल विविधीकरण, आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने, सिंचाई सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण, किसानों की उत्पादकता एवं आय में वृद्धि तथा किसानों को बेहतर बाजार एवं मूल्य संवर्धन गतिविधियों से जोड़ने पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को पारंपरिक कृषि से आगे बढ़ाकर विविधीकृत, लाभकारी एवं बाजारोन्मुखी कृषि की ओर प्रोत्साहित करना है।
उन्होंने कृषक विकास संगठनों की सक्रिय भागीदारी को परियोजना की सफलता के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए सभी प्रतिभागियों से परियोजना की गतिविधियों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने तथा किसानों तक इसका अधिकतम लाभ पहुंचाने का आह्वान किया। मुख्य अतिथि ने सभी प्रतिभागियों, संसाधन व्यक्तियों एवं आयोजन से जुड़े अधिकारियों का धन्यवाद एवं आभार व्यक्त करते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।
इसके पश्चात डॉ. हेम राज वर्मा द्वारा सभी मुख्य अतिथियों, संसाधन व्यक्तियों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया गया। उन्होंने प्रशिक्षण में प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से किसानों एवं कृषक विकास संगठनों को परियोजना की विभिन्न गतिविधियों को बेहतर ढंग से समझने तथा प्रभावी रूप से लागू करने में सहायता मिलती है। इस अवसर पर फार्म मशीनरी एवं कृषि यंत्रीकरण, फसल विविधीकरण, कृषि प्रदर्शन, सिंचाई विकास तथा परियोजना के अंतर्गत संचालित अन्य गतिविधियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीक एवं परियोजना की सुविधाओं का अधिकतम लाभ पहुंचाने तथा उनकी आय में वृद्धि के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने पर जोर दिया। अंत में उन्होंने सभी प्रतिभागियों एवं आयोजन से जुड़े अधिकारियों का कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए धन्यवाद किया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर डॉ. जयंत रत्ना ने मुख्य अतिथि, संसाधन व्यक्तियों, कृषि विज्ञान केंद्र, बजौरा के अधिकारियों तथा प्रशिक्षण में भाग लेने वाले प्रबंधन समिति तथा कृषक उत्पादक संगठनों के सभी सदस्यों का हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी के सहयोग की सराहना करते हुए आशा व्यक्त की कि प्रतिभागी प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त तकनीकी एवं व्यावहारिक ज्ञान का उपयोग अपने-अपने क्षेत्रों में करेंगे तथा अन्य किसानों तक भी इसका प्रभावी प्रसार करेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम समूहों की क्षमता वृद्धि, आजीविका संवर्धन एवं ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ कृषि विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर पीo एमo सीo से श्री तृशान पुरोहित (post-harvest
engineer) जिला परियोजना प्रबंधन इकाई मंडी से निर्माण अभियंता श्री सौरव कुमार, खण्ड परियोजना प्रबंधन इकाई, कुल्लू से कृषि अधिकारी संजय कुमार, कृषि प्रसार अधिकारी श्री मति ज्या प्रधा एवं आई.ई.सी. समन्वयक युवराज भी उपस्थित रहे।
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