देवभूमि में देवताओं का ही नहीं हो रहा सम्मान”- आम आदमी पार्टी विकास के नाम पर लोगों की आस्था से खिलवाड़ ठीक नहीं*
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“देवभूमि में देवताओं का ही नहीं हो रहा सम्मान”- आम आदमी पार्टी
विकास के नाम पर लोगों की आस्था से खिलवाड़ ठीक नहीं*
बिजली महादेव रोपवे निर्माण पर उठे सवाल
देसी चैनल कुल्लू
बिजली महादेव जैसे पवित्र धार्मिक स्थल पर रोपवे निर्माण के नाम पर जो प्राकृतिक संसाधनों का दोहन और पर्यावरणीय विनाश हो रहा है, वह रुकने का नाम नहीं ले रहा। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि हिमाचल प्रदेश को ‘देवभूमि’ कहे जाने के बावजूद यहां के देवस्थलों और आस्था स्थलों की विशिष्टता एवं मान्यता का सम्मान नहीं हो रहा।
बिजली महादेव क्षेत्र के लोग विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन जब विकास के नाम पर उनकी ज़िंदगियों, प्राकृतिक सुरक्षा और सांस्कृतिक आस्थाओं पर संकट मंडराने लगे, तब सवाल उठना स्वाभाविक है। हर साल आपदाओं से जूझते कुल्लू ज़िले में ऐसी परियोजनाएं जो पर्वतीय ढांचे को और अधिक कमजोर व अस्थिर बनाएं, वे न केवल असंवेदनशील हैं बल्कि खतरनाक भी।
हम सभी चाहते हैं कि बिजली महादेव जैसे पवित्र स्थल तक लोगों की पहुँच सरल हो, लेकिन उस सुगमता की कीमत इस स्थल की आत्मा और उसके आस-पास बसे गाँवों की सुरक्षा नहीं हो सकती।
आम आदमी पार्टी स्पष्ट करती है कि:
• जब तक इस परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय विनाश — जैसे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, पर्वतीय भू-संरचना की खुदाई, और जल स्रोतों पर प्रभाव — पर रोक नहीं लगती, हम इस रोपवे निर्माण का विरोध करते रहेंगे।
• स्थानीय जनता, बुद्धिजीवी वर्ग, पर्यावरण विशेषज्ञों, और सांस्कृतिक संस्थाओं को विश्वास में लेकर ही कोई भी विकास योजना आगे बढ़ाई जाए।
• सरकार यह स्पष्ट करे कि इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई के बाद कहीं पर वनरोपण की कोई कार्ययोजना है भी या नहीं।
आज आवश्यकता इस बात की है कि हम विकास को जनसुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के साथ जोड़ें। क्योंकि ऐसा कोई विकास स्वीकार्य नहीं हो सकता जो लाशों और विनाश पर खड़ा हो।
आम आदमी पार्टी हिमाचल प्रदेश मांग करती है कि बिजली महादेव रोपवे निर्माण को लेकर उत्पन्न असुरक्षा की स्थिति को दूर करने के लिए तुरंत जन-सुनवाई आयोजित की जाए और स्थानीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
आम आदमी पार्टी मांग करती है कि किसी भी निर्माण कार्य शुरू होने से पहले एक संपूर्ण पारिस्थितिक और भूवैज्ञानिक प्रभाव अध्ययन, साथ ही प्रतिपूरक वनरोपण के पारदर्शी कार्यान्वयन होना चाहिए । पार्टी का तर्क है कि भूमि के धंसने, कचरे के संचय और दीर्घकालिक आवास क्षरण को रोकने के लिए स्थल की वहन क्षमता को परिभाषित करना आवश्यक है।
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