लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए 1 नवंबर को दिल्ली में जुटेगा कांग्रेस का हुजूम
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लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए 1 नवंबर को दिल्ली में जुटेगा कांग्रेस का हुजूम
देसी चैनल कुल्लू
रामलीला मैदान में कांग्रेस और INDIA गठबंधन की विशाल रैली, हिमाचल से अधिक से अधिक संख्या में कार्यकर्ताओं को पहुंचने की अपील
कुल्लू। लोकतंत्र की रक्षा, संविधान की गरिमा बनाए रखने और निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता एवं स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के मुद्दे पर कांग्रेस ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाले विशाल विरोध प्रदर्शन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। कांग्रेस एवं INDIA गठबंधन की ओर से आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में देशभर से कांग्रेस नेताओं, विधायकों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है।
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता नवनीत सूद ने कहा कि देश में संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने के प्रयासों को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं। विशेष रूप से निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता और स्वतंत्रता पर उठ रहे सवाल लोकतंत्र के लिए चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव करवाना उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है।
नवनीत सूद ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति को लेकर विवाद की शुरुआत केंद्र सरकार द्वारा चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में किए गए बदलाव से हुई। मार्च 2023 में सर्वोच्च न्यायालय ने अनूप बरनवाल बनाम भारत सरकार मामले में नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश की सदस्यता वाली चयन समिति की अंतरिम व्यवस्था निर्धारित की थी। हालांकि, दिसंबर 2023 में केंद्र सरकार द्वारा पारित नए कानून में मुख्य न्यायाधीश को चयन समिति से बाहर कर उनकी जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल कर दिया गया। कांग्रेस ने इस बदलाव को निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता के लिए उचित नहीं बताया था।
उन्होंने कहा कि फरवरी 2025 में इसी कानून के तहत ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया। उस समय लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने नियुक्ति प्रक्रिया पर असहमति जताते हुए सर्वोच्च न्यायालय में कानून की संवैधानिक वैधता पर निर्णय आने तक नियुक्ति स्थगित रखने की मांग की थी।
कांग्रेस प्रवक्ता ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिहार से शुरू हुई इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने, नए मतदाताओं के पंजीकरण और प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आए हैं। निर्वाचन आयोग के भीतर एसआईआर से जुड़े फैसलों पर चुनाव आयुक्तों के बीच कथित मतभेदों की खबरों ने भी संस्थागत पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं।
उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर भी सुनवाई चल रही है। ऐसे में निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
नवनीत सूद ने बताया कि हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विनय कुमार और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सहित प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने पार्टी के सभी नेताओं, वर्तमान एवं पूर्व विधायकों, जिला और ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों, युवा कांग्रेस, एनएसयूआई, महिला कांग्रेस, सेवादल तथा अन्य अग्रणी संगठनों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से 1 नवंबर को दिल्ली पहुंचने का आह्वान किया है।
उन्होंने कहा कि यह किसी एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं, बल्कि देश के लोकतंत्र, संविधान और प्रत्येक नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। प्रत्येक नागरिक को यह विश्वास होना चाहिए कि उसका वोट सुरक्षित है और चुनाव करवाने वाली संस्था किसी भी राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर काम कर रही है।
नवनीत सूद ने सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
उन्होंने कहा, “हमारा वोट, हमारा अधिकार है। निर्वाचन आयोग किसी राजनीतिक सत्ता का नहीं, बल्कि संविधान और देश की जनता का जवाबदेह होना चाहिए। आइए, 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में एकजुट होकर लोकतंत्र और संविधान की रक्षा का संकल्प लें।
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