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कुल्लू जिला की डॉ. श्रुति मोरे भारद्वाज को दिव्यांगजन पुनर्वास के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया जाएगा

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कुल्लू जिला की डॉ. श्रुति मोरे भारद्वाज को दिव्यांगजन पुनर्वास के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया जाएगा

हिमाचल के दुर्गम इलाकों में “थेरेपी ऑन व्हील्स” के माध्यम से बदल रही जिंदगियाँ

देसी चैनल कुल्लू

दिव्यांगजनो के पुनर्वास और सशक्तिकरण के क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए डॉ. श्रुति मोरे भारद्वाज को “दिव्यांगता के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ पुनर्वास पेशेवर” के राष्ट्रीय पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया जाएगा। यह पुरस्कार 3 दिसंबर 2025 को अंतर्राष्ट्रीय विकलांगता दिवस, के अवसर पे भारत के राष्ट्रपति द्वारा विशेष समारोह में प्रदान किया जाएगा।


मुंबई जैसे महानगर और विदेश में करियर के आकर्षक अवसरों को छोड़कर डॉ. श्रुति मोरे भारद्वाज ने हिमाचल प्रदेश के कुल्लू व चंबा जैसे दुर्गम क्षेत्रों में दिव्यांग बच्चों और उनके परिवारों की सेवा करने का संकल्प लिया। उन्होंने “सांफिआ फाउंडेशन” की स्थापना कर समावेशी शिक्षा और पुनर्वास सेवाओं को पहाड़ों की दहलीज तक पहुँचाया।


डॉ. श्रुति मोरे भारद्वाज द्वारा शुरू की गई अनूठी पहल “थेरेपी ऑन व्हील्स” ने क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाया है। यह मोबाइल यूनिट दुर्गम गाँवों में जाकर फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, स्पीच थेरेपी और नैदानिक सेवाएँ प्रदान करती है, जहाँ पहले ऐसी सुविधाएँ नहीं पहुँच पाती थीं। इसके साथ उनकी संस्था जिला हस्पताल कुल्लू में सरकार के सहयोग के लिए अर्ली इंटरवेंशन सेंटर का संचालन करती है!जिला कुल्लू, लाहुल, चंबा, मंडी जिला में भी अपने जागरूकता कार्यक्रमों को चला चुके है!

इस उपलब्धि पर डॉ. श्रुति मोरे भारद्वाज ने कहा, “यह पुरस्कार हिमाचल के हर उस बच्चे और परिवार के लिए है, जिन्होंने मुझ पर विश्वास जताया है। उन्होंने अपनी टीम को भी इसका श्रेय दिया है! हिमाचल के अन्य जिलों में भी अपने काम के एक्सपेंशन की बात कही है!उन्होंने कहा हमारा लक्ष्य दिव्यांगजनों को मुख्यधारा में लाने के लिए नवाचारी समाधानों का सृजन करना रहा है। ‘थेरेपी ऑन व्हील्स’ इसी दिशा में एक कदम है।”
डॉ. श्रुति मोरे भारद्वाज के पति डॉ गौरव भारद्वाज जो कि प्रदेश विश्वविद्यालय में सहायक आचार्य है और उनके दो बच्चे —राम, पार्वती और भारद्वाज वह मोरे परिवार ने इस यात्रा में उनके साथ खड़े रहकर इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सांफिआ फाउंडेशन अब तक 1,200 से अधिक दिव्यांग बच्चों और युवाओं को सेवाएँ प्रदान कर चुका है और “थेरेपी ऑन व्हील्स” के माध्यम से 50 से अधिक गाँवों तक पहुँच बनाई है।

 

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