देव संस्कृति, लोक संस्कृति और सनातनी त्यौहारों के नाम पर आयोजित कार्यक्रमों में फुहड़ता बर्दाश्त नहीं।
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देव संस्कृति, लोक संस्कृति और सनातनी त्यौहारों के नाम पर आयोजित कार्यक्रमों में फुहड़ता बर्दाश्त नहीं – जय ठाकुर
कुल्लू, पतलीकुहल
देसी चैनल कुल्लू
देवभूमि कुल्लू में मनाए जाने वाले कालेजों के कार्यक्रमों,होली उत्सव के दौरान कथित फुहड़ता और अव्यवस्था को लेकर देव संस्कृति से जुड़े लोगों ने कड़ा विरोध जताया है। देव सेवा संस्था के अध्यक्ष जय ठाकुर ने अंतरराष्ट्रीय कला केंद्र, ढालपुर में होली के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों पर गंभीर आपत्ति जताते हुए प्रशासन और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
जय ठाकुर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कला केंद्र कुल्लू हमारी समृद्ध देव संस्कृति और लोक संस्कृति का मूल केन्द्र है। यहां पर इस प्रकार के आयोजन नहीं होने चाहिए। होली के दिन जिस प्रकार से कार्यक्रमों के नाम पर फुहड़ता परोसी गई है, वह न केवल निंदनीय है बल्कि देवभूमि की सनातनी परंपराओं का भी खुला उपहास है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कार्यक्रमों के दौरान नशे में धुत युवा आपस में लड़ाई-झगड़े करते दिखाई देते हैं, जिससे समाज में गलत संदेश जाता है और सांस्कृतिक वातावरण दूषित होता है।
उन्होंने कहा कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि कटागली शाड़ ढालपुर, जो देव संस्कृति और ठारा करडू की सौह से जुड़ा क्षेत्र माना जाता है, वहीं इस प्रकार की गतिविधियां हो रही हैं। इसके बावजूद न तो राजपरिवार और न ही देव समाज इस पर कोई संज्ञान ले रहा है, जो हैरानी की बात है। उन्होंने कहा कि राजपरिवार और देव समाज को आगे आना चाहिए।ऐसा ही रहा तो इस स्थान की गरिमा धीरे धीरे खो जायेगी।
जय ठाकुर ने कहा कि प्रशासन की मौजूदगी में इस तरह के कृत्य होना और उन पर रोक न लग पाना प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।
देव सेवा संस्था के अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि संस्था ऐसे किसी भी कार्यक्रम की कड़ी निंदा करती है जो देव संस्कृति और सनातन परंपराओं का उपहास उड़ाते हों। उन्होंने प्रशासन और सरकार से मांग की कि भविष्य में इस प्रकार के आयोजनों पर तुरंत रोक लगाई जाए और सांस्कृतिक आयोजनों की गरिमा बनाए रखने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
उन्होंने बताया कि देव सेवा संस्था इस मुद्दे को लेकर जल्द ही उपायुक्त कुल्लू के माध्यम से सरकार को ज्ञापन सौंपेगी। इसके साथ ही भाषा एवं संस्कृति विभाग के जिला भाषा अधिकारी के माध्यम से महामहिम राज्यपाल को भी ज्ञापन भेजा जाएगा, ताकि देवभूमि की परंपराओं और सांस्कृतिक मर्यादाओं की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
जय ठाकुर ने कहा कि देवभूमि की पहचान उसकी देव संस्कृति, मर्यादा और अनुशासन से है।अपने मनोरंजन के लिये हम अपनी परंपराओं और देव संस्कृति के नीती नियमों से समझौता ना करें।देव स्थलों और मर्यादित जगह पर इस प्रकार के कार्यक्रमों को तुरंत वंद करना होगा।इसे किसी भी हाल में फुहड़ता या अराजकता की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा।
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