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अपने ही गांव का स्कूल छोड़ने को मजबूर बच्चे, शिक्षा व्यवस्था पर सवाल।

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अपने ही गांव का स्कूल छोड़ने को मजबूर बच्चे, शिक्षा व्यवस्था पर सवाल।

केवल 3 शिक्षकों के भरोसे पढ़ाई, हाई स्कुल शिल्ली में वर्षों से खाली पड़े है अहम पद।

स्टाफ की भारी कमी और कमरों की कमी से अभिभावक चिंतित।

60 छात्र दूसरे स्कूलों में जाने को तैयार, ग्रामीणों ने उठाई आवाज।

देसी चैनल कुल्लू 

तीर्थन घाटी गुशेनी बंजार(परस राम भारती):- कुल्लू जिले के बंजार शिक्षा खंड के अंतर्गत आने वाला राजकीय उच्च पाठशाला शिल्ली इन दिनों गंभीर शिक्षकीय संकट से जूझ रहा है। स्कूल में लंबे समय से शिक्षकों के कई महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। हालात ऐसे बन गए हैं कि करीब 60 विद्यार्थी अब अपने ही गांव का स्कूल छोड़कर दूसरे स्कूलों में जाने को मजबूर हो रहे हैं।

वर्तमान में विद्यालय में केवल तीन शिक्षक ही कार्यरत हैं, जिनमें एक मुख्य अध्यापक, एक टीजीटी आर्ट्स और एक टीजीटी हिंदी शामिल हैं। अन्य सभी विषयों के पद लंबे समय से खाली पड़े होने के कारण छात्रों को सभी विषयों की पढ़ाई नियमित रूप से नहीं मिल पा रही है।

वर्षों से खाली पड़े हैं महत्वपूर्ण पद.

प्राप्त जानकारी के अनुसार मेडिकल शिक्षक का पद जुलाई 2022 से,
नॉन-मेडिकल जुलाई 2024 से,
संस्कृत शिक्षक मार्च 2022 से,
पीईटी शिक्षक वर्ष 2016 से,
और कला अध्यापक का पद अगस्त 2003 से खाली पड़ा है।
इसके अलावा, विद्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का पद भी वर्ष 2012 से खाली है, जिससे स्कूल के दैनिक कार्यों में भी दिक्कतें आ रही हैं।

भवन और सुविधाओं की भी कमी.

विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं की भी भारी कमी है। यहां पांच कक्षाओं के लिए मात्र दो ही कमरे उपलब्ध हैं, जिनमें बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ कार्यालय का कार्य भी किया जाता है। इससे छात्रों को बैठने और पढ़ने में काफी परेशानी होती है।

अभिभावकों में बढ़ रही चिंता.

अभिभावकों का कहना है कि शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जिससे उनका भविष्य अधर में लटक गया है। इसी वजह से अब कई अभिभावक अपने बच्चों को दूसरे स्कूलों में भेजने का निर्णय ले रहे हैं।

ग्रामीणों ने उठाई आवाज.

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने इस समस्या को कई बार शिक्षा विभाग और सरकार के सामने रखा, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की है कि शीघ्र सभी रिक्त पदों को भरा जाए और स्कूल भवन की दूसरी मंजिल के निर्माण के लिए उचित बजट उपलब्ध कराया जाए।

इस संबंध में मोहर सिंह ठाकुर पूर्व उप प्रधान, सरणु राम, भीमसेन, भागचंद, गोविंद सिंह, रंजीत सिंह, योगराज, एसएमसी प्रधान दिलीप सिंह, कांता देवी, जयचंद, दूर सिंह, बहादुर सिंह, ओम प्रकाश, सीता देवी, मदन लाल, नरोत्तम सिंह, जीतराम, यशपाल, पदम सिंह और मेहर चंद सहित अन्य ग्रामीणों ने अपनी चिंता जाहिर की है।

प्रशासन से उम्मीद.

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो सकता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और शिक्षा विभाग इस गंभीर मामले पर कब तक संज्ञान लेते हैं, ताकि गांव के बच्चों को अपने ही स्कूल में बेहतर शिक्षा मिल सके और उन्हें पलायन न करना पड़े।

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